" नींद ......"
आ गयी है नींद मुझको अब तो सोने दो
राख़ में शमशान की ख़ामोशी होने दो ....
दास ने माँगी है हक़ के बदले मालिक की दुआ
ए मालिकों इस कर्म को इन्साफ़ अब तुम दो ...!!
ज़िन्दगी भर ज़िन्दगी देती रही ताना
रूप का छिछला असर था खेल मस्ताना
अब जिस्म की पगडंडियों के दाग धुलने दो
ख़ाब को दे दो किनारा भोर फटने दो ...............!!
बाँट कर गुड्दानियाँ खोला है मयखाना
चुटकुला नमकीन चटकारा है ग़म खाना
मन की मर्ज़ी के हलक़ पर हार चढ़ने दो
रूह के मासूम चेहरे को निखरने दो ................!!
छोड़ दो बेकार की बातों पे शर्माना
मुफ़्त में उछली शरम पर मर के दिखलाना
अब नर्म पड़ते वक़्त को ठोकर ना लगने दो
और बेबसी की चोट पर क़िस्से ना गढ़ने दो ...!!
नोट पर गाँधी के चश्मे का लगा होना
कहता है देखो वफ़ादारी ना तुम खोना
आँख पर बेइमानियों की रोक लगने दो
************** विक्रम चौधरी ******************

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