" घरौंदा
ला ...."
जा
उस पंछी का घरौंदा ला
जिसमें
दाने तिनके हों
बच्चे
नींद में सोये हों
पैदा
वो दो दिन के हों ...
माँ
उनकी ना देख रही हो
शाम
का चुग्गा खोज रही हो ...
ऐसी
जुगत तू करके ला
अपनी
खुदी से लड़ के ला ...
जा
उस पंछी का घरौंदा ला ....!!
जा
उस नन्ही का बिछौना ला
जिसमें
हूर के मनके हों
सच्चे
लाड में पलती हो
जो
लोरी सुन के सोती हो ...
माँ
उसकी पनघट पे गयी हो
काठ का गुड्डा ढूँढ रही हो ...
ऐसी
जुगत तू करके ला
अपनी नज़र से बच के ला ....
जा
उस पंछी का घरौंदा ला ....!!
******* विक्रम
चौधरी *******


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