Friday, 27 June 2014

" बम बम अली शंकर ...."











" बम  बम  अली  शंकर ...."

बम  बम  अली  शंकर
अगड़  बम  बम  अली  शंकर ...!!

बैर  भूत  परवान  चढ़ा  दे
कुण्ठा  को  श्मशान  दिखा  दे
निश्छल  निर्मल  बहते  जल  में
मार  ना  तू  कंकर  ..............!
बम  बम  अली  शंकर ...........!!

एक  हाथ  रख  शंखनाद 
रख  एक  हाथ  में  बूटी
अलख  निरंजन  साँच  सुबक  ले
बाक़ी  बात  है  झूठी
जंगल  जंगल  बिछा  के  मंगल
मार  ना  तू  मंतर ................!
गंगा  में  रोज़  नहाने  से 
ना  होगा  तू  सुन्दर ..............!
बम  बम  अली  शंकर ...........!!

पूरे  पथ  का  बन  जा  तू  पथिक
आधे  में  नहीं  रहबर .....
सुलगे  ग़र  तन  तो  डाल  भसम
फूलों  में  छुपे  खंजर ......
आनन्द  अनंत  की  भूख  हुआ 
मानस  भी  हुआ  बन्दर .........!!
बम  बम  अली  शंकर ...........!!

****** विक्रम चौधरी *******

Wednesday, 18 June 2014

" हू ...."
















" हू ...."

मेरे  अंदर  हू  है 
तेरे  अंदर  हू
मेरा  मुझमें  साईयाँ
मैं  यार  क़लन्दर  हू ....!!

मेरे  अंदर  हू  है 
तेरे  अंदर  हू .............!!

काटे  ते  ना  कटे
रूह  की  बेड़ी  जां  तले ..!
छोड़े  ना  पीछा  चले  पीछे
जहाँ  तन  जले ...!!

चुघे  घट  घट  कालजा
ना  मिटे  मंजर  हू
मेरे  अंदर  हू  है 
तेरे  अंदर  हू .............!!

देखे  चौबारा  फिर  दोबारा
जान  बन  पले .....!
फिरे  रे  राही  मारा  मारा
साँस  बंद  पड़े .....!!

चुने  चिड़ियाँ  घौंसला 
ना  थमे  अंधड़  हू
मेरे  अंदर  हू  है 
तेरे  अंदर  हू .............!!


*** विक्रम  चौधरी ***