" बम
बम अली शंकर ...."
बम
बम अली शंकर
अगड़
बम बम अली शंकर
...!!
बैर
भूत परवान चढ़ा दे
कुण्ठा
को श्मशान दिखा दे
निश्छल
निर्मल बहते जल में
मार
ना तू कंकर
..............!
बम
बम अली शंकर ...........!!
एक
हाथ रख शंखनाद
रख
एक हाथ में बूटी
अलख
निरंजन साँच सुबक ले
बाक़ी
बात है झूठी
जंगल
जंगल बिछा के मंगल
मार
ना तू मंतर ................!
गंगा
में रोज़ नहाने से
ना
होगा तू सुन्दर ..............!
बम
बम अली शंकर ...........!!
पूरे
पथ का बन जा तू पथिक
आधे
में नहीं रहबर .....
सुलगे
ग़र तन तो डाल भसम
फूलों
में छुपे खंजर ......
आनन्द
अनंत की भूख हुआ
मानस
भी हुआ बन्दर .........!!
बम
बम अली शंकर ...........!!
****** विक्रम चौधरी *******

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