" सैयाँ बड़ा बेईमान ...."
सखी मोरा सैयाँ बड़ा बेईमान
डारे नजर नाहीं जाए रे जान ...!!
खनक सी भरे रे हियरा
पनघट पे शाम ...
रात की नथ पे उतरा है चाँद ...
घुँघरू पायलिया के रुनझुन रुनझुन
बिरहा के मद में गावें सजन धुन ...
धरे ना पिहरवा अँसुअन पे कान
सखी मोरा सैयाँ बड़ा बेईमान ....!!
भरम सौ करे रे पुरवा
जपै तोरा नाम ...
मन की अगन क्यों जाने ना राम ...
पिया की लगन में खोये बैठी सुध बुध
लागे नाहीं मनवा बन गयी मैं तो बुत ...
करो ना साँवरिया मोहे बदनाम
सखी मोरा सैयाँ बड़ा बेईमान ......!!
******* विक्रम चौधरी ********


















