" जमूरा ....."
जमूरा
खेल की मस्ती में दीवाना
सिखाये
भीड़ के सिक्कों
पे मर जाना ....!!
किसी
की बाँध कर आँखें
किसी
की थाम कर साँसें
किसी
के होंठ पर हँस के
किसी
की बात में बस के
वो
उछले ढोल की थपकी पे मस्ताना
....!
जमूरा
खेल की मस्ती में दीवाना
सिखाये
भीड़ के सिक्कों
पे मर जाना ....!!
धुँए
की डोर वो पकड़े
कभी
डोरी पे जां अटके
बजे
ताली तो उसका दिल
ख़ुशी
में ज़ोर से धड़के
ये
कैसा खेल है मौला
खिलाड़ी
का फ़ना होना
लड़े
अपने ही फ़न से
जिस्म
के हिस्सों का हर कोना ....!!
जमूरा
डुगडुगी की ताल का शाना
बिछाए
मौत के बिस्तर
पे सिरहाना ....!!
जमूरा
खेल की मस्ती में दीवाना
सिखाये
भीड़ के सिक्कों
पे मर जाना ....!!
*********** विक्रम चौधरी ************

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