Tuesday, 13 May 2014

" दे हलकारा ....."



















" दे  हलकारा ....."

ये  वक़्त  है  बदला  लेने  का
और  ख़ुद  को  ज़रा  बदलने  का
बस  रहने  दे  अब  और  नहीं
तू  बोल  दे  बन्दे  हलकारा ... दे  हलकारा ....!!
माटी  ख़ुद  अपनी  बेच  के 
बे  माटी  है  देखो  जग  सारा ... दे  हलकारा .....!!

कब  तक  सड़कों  के  गड्ढों  में  ढूँढोगे  क़िस्मत  अपनी
कब  तक  मजबूर  के  पल्लू  से  पौंछोगे  सूरत  चिकनी ....!!

निकलो  F B  और  Twitter  से 
निकलो  अंग्रेज़ी  हूटर  से ....
तुम  रोज़  करप्शन  की  बातों  पर
घण्टों  ताव  दिखाते  हो ....
ये  है  ग़लत  और  वो  है  ग़लत
कह  कह  कर  आँख  चढ़ाते  हो ....!!

क्या  कभी  किसी  ने  आँख  मूँद  कर  ख़ुद  को  भी  देखा  है
सबकी  बॉलिंग  और  बैटिंग  में  हर  मौक़े  पर  चौका  है 
क्या  सिगनल  तोड़  के  हमने  ख़ुद  चालान  कभी  माँगा  है
जो  लेन  देन  से  जुड़ा  है  रहिमन  प्रेम  का  वो  धागा  है ......!!

चोर  पुलिस  की  रेस  में  गच्चा  कौन  यहाँ  खाता  है
है  दम  जिसके  जूते  में  दौड़  के  मंज़िल  वो  पाता  है
पहनो  सर  पे  टोपी  उजली  तो  सब  कुछ  मिल  जाता  है
वरना  सच्चाई  की  हाण्डी  में  झाँको  तो  सन्नाटा  है …….!!

बदलेगा  सिस्टम  सोच  के  हम  भी  चुप  करके  बैठे  हैं
क्या  हुआ  हूँ  मैं  पागल  बाजू  के  घर  भी  तो  बेटे  हैं .......!!



****************** विक्रम  चौधरी *******************

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