Tuesday, 13 May 2014

" रोती कलम ....."

















" रोती  कलम ....."

अल्फ़ाज़  के  हालात  पर
रोती  कलम  देखो ..........!
जिसको  नहीं  बाँटी  अक़ल
उसकी  शक़ल  देखो ........!!

उतरे  हैं  काग़ज़  पर 
हक़ीक़त  झूठ  फिर  एक  साथ  ही
किसको  कहें  ज़ालिम 
भला  किसको  कहें  हम  सादगी ...!

हाक़िम  की  हर  आवाज़  पर
ताली  ज़रा  फैंको .......!
जिसने  किये  छुप  कर  क़तल
खुल  कर  रहम  देखो ......!!

हमने  भी  अपने  दिल  को
समझाया  कहा  सोचो ....!
कुछ  तो  ज़माने  की 
क़रामातों  को  तुम  सीखो ...!!

अल्फ़ाज़  के  हालात  पर
रोती  कलम  देखो ..........!
जिसको  नहीं  बाँटी  अक़ल
उसकी  शक़ल  देखो ........!!


****** विक्रम  चौधरी ******

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