" जाने कौन ख़ुदा है ..."
भूख़ मरे ना मरे दिलासा
कटे हैं खुर क्यों कटे ना फाँका ...
आधी आधी रात चन्द्रमा
चील को ठौर दिखाए
मानस मन से घिरा सोच में
दूर खड़ा ललचाये ........!!
कौन दुःशासन है जग माहीं
जाने कौन भला है
बंद करो सब खुली किवाड़ी
पग पग चोर खड़ा है
राम कहीं , कहीं नाम है अल्लाह
देखो बशर जुदा है
इधर ख़ुदा है उधर ख़ुदा है
कैसी घोर सुलह है ............!!
मोह माया से लड़े आत्मा
जाने कौन ख़ुदा है ............!!
एक है सूरत ऐनक सौ
हर ऐनक बने मदारी
आँखें तक हैरां ना हों
मारे जब जीभ गुलाटी
लगी दीन को ठोकर कस के
देखो असर हुआ है
चीर कलेजा मन का पंछी
जाने कहाँ उड़ा है
पनहारी का देख तमाशा
पनघट गरज उठा है
मोह माया से लड़े आत्मा
जाने कौन ख़ुदा है ............!!
***** विक्रम चौधरी *****

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