" रंगशाला ....."
पृथ्वी के अधरों पर
जीवन की है रंगशाला ...
क़िरदार में मानव के
कोई चित्र दिखा है काला ...!!
लाओ तराज़ू तौलें
आधे पूरे और पौने
रह जाएँ ना कुचले मसले
ना छोड़ो कद के बौने ....
आधार अलग व्यापार अलग
जीने के भी संसार अलग
बदलें रग़ में बहती धारा
बच्चों के तंग बिछौने
छोड़ें दुखियों को रोने
लाओ तराज़ू तौलें ........!!
पृथ्वी के अधरों पर
जीवन की है रंगशाला ...
क़िरदार में मानव के
कोई चित्र दिखा है काला ...!!
कुण्ठा में दफ़न मासूम ज़हन
काँटों की पकड़ में है धड़कन
रख दो सूली पे तन सारा
दौड़ें चल जाल बिछाने
बाँधें नदिया के कोने
लाओ तराज़ू तौलें ........!!
पृथ्वी के अधरों पर
जीवन की है रंगशाला ...
क़िरदार में मानव के
कोई चित्र दिखा है काला ...!!
***** विक्रम चौधरी *****

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