" नदिया ...."
नादिया
से करूँ मैं सवाल
पूछे
नाहीं मोसे मोरा हाल
... !!
बहे
क्यों अकेली छोड़ के मोहे
बने
ना सहेली जोड़ के मोहे
खींचे
नित पुरवा के बाल
.....!!
अंग
लगाए नाव के अंग से
सुने
तू मेघ मल्हार
माझी
के संग संग सुर मिलाये
रीझे
तू करके श्रृंगार ...
करे
क्यों ठिठोली छेड़ के मोहे
बनूँ
मैं पहेली झेल के तोहे ...
बीते
दिन करके मलाल ……!!
चींखे
री मन का बैरी मयूरा
आधी
आधी रात
चाँद
की गोद में बैठ नहाये
तेरी
सब सौगात ...
भरे
रे हिलोरी हेज के मोहे
करे
जोरा जोरी खेल के मोहे
छूए
नाहीं रुख़े मोरे गाल
......!!
******** विक्रम
चौधरी *******

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