" साँचा नाम ....."
फैंको
झूठी बोलियाँ
लेके
साँचा नाम ...!
चाहे
तो अल्लाह कहो
या
बोलो सिया राम ....!!
भीतर
भीतर एक हैं
मानस
के हर काम
फिर
काहे को बँट गए
टुकड़ा
टुकड़ा गाम ....!!
पेट
भरे की नियति
कर
बैठी संग्राम
क़तरा
क़तरा ख़ून का
खोजे
तन की छाओं ....!!
दानव
ओढ़े चूनरी
डोल
रहा सब धाम
घर
घर जाके माँग रहा
भिक्षा
में विश्राम .......!!
"" विक्रम चौधरी ""

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