" ओ मोरे चन्दा ......"
नींद की छत पे तारे हैं बाराती
ओ मोरे चन्दा ओ मोरे साथी .....!!
गयी पनघट की प्यास नहाती
भोर ने पकड़ी सूर्य की बाती
ओ मोरे चन्दा ओ मोरे साथी .....!!
उतरन पहनाती शाम
खोयी बैरन अपने गाम
अन्धेरा जब खोले पाँव
कौन अल्लाह कौन है राम ...
कृष्ण के रथ की जीत है आधी ...
मुर्शद के बिन हार ख़ुदा की ...
ओ मोरे चन्दा ओ मोरे साथी .....!!
जल बिन लहराती नाव
छिल छिल दिखलाती घाव
नदिया के पथ सूखी छाँव
कौन राजा कौन ग़ुलाम ...
स्वप्न के तन की पीर है दासी ...
दर्शन तप बिन चाह दुआ की ...
ओ मोरे चन्दा ओ मोरे साथी .....!!
********* विक्रम चौधरी ************

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