" कुछ तू बता ..... "
बंद है बरसात के
गिरने का हर एक रास्ता ...
अश्क़ों ने छीना है फ़लक
अश्क़ों ने छीना है फ़लक
बरसे हैं बन के दास्ताँ ...
क्या हाल है ए ज़िन्दगी ...
कुछ मैं कहूँ कुछ तू बता ....!!
मस्ती के मयखानों में अब
साक़ी नहीं ना जाम है ...
लगता है हर नुक्कड़ शहर
खाली हैं सब ना काम है ...
इठला रही है रौशनी
दरिया में सूरज जा छुपा ...
क्या हाल है ए ज़िन्दगी ...
कुछ मैं कहूँ कुछ तू बता ....!!
मौला ने कर ली है सुलह
जारी किया फ़रमान है ...
छूटी है हर घर से बसर
दड़बों में अब आवाम है ...
ज़िद्दी है बन्दा बेफ़िक़र
कहता है ख़ुद को आसमां ...
क्या हाल है ए ज़िन्दगी ...
कुछ मैं कहूँ कुछ तू बता ....!!
******* विक्रम चौधरी ********

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