" मैं कौन हूँ ...."
ना पूछ मेरे यार
के मैं कौन हूँ कहाँ से हूँ ...
ज़ात क्या है मेरी
कौनसी बिरादरी से हूँ ...!!
पूजता हूँ राम को या अल्लाह मेहरबान को
गुरु के ग्रन्थ को या ईसा पे लिखी क़िताब को ...!!
शूद्र हो के मल गया मैं अपनी पहचान को
ब्राह्मण हो के छल गया मैं सच्चे इंसान को
क्षत्रिय हो के भी बचा सका ना अपनी लाज को
वैश्य हो के खा गया मैं धरती के अनाज को ...!!
ना पूछ मेरे यार
के मैं कौन हूँ कहाँ से हूँ ...
मुखौटा माया में रंगा रंगीन और हो गया
जो मामला आसान था संगीन और हो गया
आज़ाद पंछियों पे देखो पिंजरा आज कस गया
देखो आसतीन में यूँ नाग सबके बस गया ....!!
ना पूछ मेरे यार
के मैं कौन हूँ कहाँ से हूँ ...
पाक़ हो गया मैं करके गंगा स्नान को
सभ्य हो गया मैं पाके काग़ज़ों के ज्ञान को
हो गया मैं संत बाँच के कथा पुराण को
मुक्त हो गया मैं करके श्रेष्ठ गृहस्थ दान को ...!!
ना रहा मनुष्य अब ना हूँ मैं जीव ही कोई
निकली आत्मा शरीर से मेरी मरी हुई .................!!
ना पूछ मेरे यार
के मैं कौन हूँ कहाँ से हूँ ...
ज़ात क्या है मेरी
कौनसी बिरादरी से हूँ ...!!
******* विक्रम चौधरी ********

Subhan Allah!
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