" खाली खाली ...."
खाली खाली ग़म सवाली
मारे टूटे दिल पे ताली ...
आँख में आँसू की दस्तक
दे रही क़िस्मत को गाली ...
खाली खाली ग़म सवाली ...!!
दुनियाँ हराम की मेरे किस काम की
किसको फ़िक़र मेरे हिस्से के आराम की ...
जिस्मों के बीच है जिस्म की दलाली ...
खाली खाली ग़म सवाली ...!!
फूलों की आड़ में काँटों का झाड़ है
रौशन बाज़ार में भूखों की बाड़ है ...
महँगी पोशाक में गोल है मवाली ...
खाली खाली ग़म सवाली ...!!
करने को धोखा हर बन्दा तैयार है
मौके पे चौके का सबको इंतज़ार है ...
चढ़ता कमान पे तीर भी ख़याली ...
खाली खाली ग़म सवाली ...!!
***** विक्रम चौधरी *****

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