" यमदूत ....."
चिमनी के बीच धधकती ये दुनियाँ
फूलों की आँख से टपके अग्नियाँ
हवा ने पहनी कमीज रे काली
धूएँ का बादल जैसे मवाली …
भागो रे भागो आया भूत
नदी किनारे यमदूत ……!!
पंछी कहे चल संग मेरे आज
करके बंद घर का दरवाज़ा …
खोलेंगे दूर गगन में दुकनियाँ
धरती की गोद में बैठी नागिनियाँ
होठों पे सबके तमीज में गाली
कुर्ता सफ़ेद ये करता जुगाली …
झूठों को मिली भली छूट
नदी किनारे यमदूत ……..!!
माटी कहे मेरा तन धुलवाजा
पहले से रंग में मोहे रंगवाजा …
पहनूँगी पैरों में मैं भी पैजनियाँ
जाने उतारी ये किसने नथनियाँ
ऊँचे बाज़ार में जेब है खाली
सोने की नगरी में बन्दा सवाली
चेहरों पे पुती है भभूत
भागो रे भागो आया भूत …
नदी किनारे यमदूत ….!!
***** विक्रम चौधरी ******

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