" बाक़ी है अभी ...."
अदना सा टुकड़ा ख़ाब का
छोटी सी ख्वाहिश चाँद की
जुगनू पहनना उँगली में
चमकी सी बाली कान की ...!
इतना ही माँगूँ मैं भला ...
देती नहीं क्यों ज़िन्दगी ......!!
ब्राउन कवर कॉपियाँ
ब्लैक रिबन चोटियाँ
स्कूल की बस में वो चढ़ना उतरना
लड़ना वो खिड़की पे बाक़ी है अभी ...!!
इतना ही माँगूँ मैं भला ...
देती नहीं क्यों ज़िन्दगी ......!!
जेबें सारी खाली हैं अभी
भरने को मुट्ठी खोली हैं अभी
टॉफ़ी और टोपियाँ
रंग भरी छतरियाँ
बारिश में भीगी भीगी काग़ज़ की कश्ती
दौड़ने को लहरों पे बाक़ी है अभी ........!!
इतना ही माँगूँ मैं भला ...
देती नहीं क्यों ज़िन्दगी ......!!
मिट्टी का गुड्डा चलता नहीं
रोटी का सैंडविच बनता नहीं
नयी नयी घड़ियाँ
घूमती वो दुनियाँ
जूतों में कसी कसी पैरों की मस्ती
झूमने को सड़कों पे बाक़ी है कभी .....!!
इतना ही माँगूँ मैं भला ...
देती नहीं क्यों ज़िन्दगी ......!!
***** विक्रम चौधरी *****
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