" उड़ जा रे पंछी ..."
चल उड़ जा रे ...
पंख लगा आकाश उड़ा रे
पंछी तेरे संग ...
ना दाना ना तिनका पंछी
चुघ बदरा के रंग ...
रे पंछी ... उड़ जा रे .....
उड़ उड़ जा रे पंछी ......!
रैन की चिठिया खोले रे
मन धीर के धागे तोड़े रे
अँखियन भीतर नींद नाहीं
सपन करावे जंग ...
पंछी तेरे संग ..............!
नीर मरम की माटी रे
पलकन पलकन साथी रे
जीवन तन की जीत नाहीं
करम के धागे तंग ...
पंछी तेरे संग ..............!!
उड़ उड़ जा रे पंछी
चल उड़ जा रे ..............!!!
******* विक्रम चौधरी ********

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