" ओ रे मोरे पिया ...."
ओ रे मोरे पिया
ले जा मोरा जिया ...
दे जा गगन शगनों का
अँखियों में घर सपनों का
खाली रैन मन भर लूँगी मैं
नैना संग तोहे पढ़ लूँगी मैं
पूरी कर दे तू दिल की दुआ ....
ओ रे मोरे पिया , ले जा मोरा जिया ....!!
सपनों से आगे उड़ जाऊँ मैं
परियों से जाके लड़ जाऊँ मैं
तू जो कहे तो जुड़ जाऊँ मैं
बूँदों के गीले अंग से
फूलों के पीले रंग से
बन के आब गिरूँ चिड़ियों के पंख पे ....
ओ रे मोरे पिया ..................................!!
झरनों पे जाके झर जाऊँ मैं
बदरा पे जाके घिर जाऊँ मैं
तू जो कहे तो जुड़ जाऊँ मैं
चाँद के टूटे अंग से
माटी के भूरे रंग से
बन के धार चलूँ नदियों के संग में ....
ओ रे मोरे पिया , ले जा मोरा जिया .....!!
"" विक्रम चौधरी ""

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