" यारा मोरी चौखट ....."
यारा मोरी चौखट सजावे ना
हाथ का कंगना मँगावे ना
यारा मोरी .....................!
काहे ना आये साजन पूछे हैं सखियाँ
बाट जुहत मोरी तरसी रे अँखियाँ
लाज का घुँघटा उढ़ावे ना
यारा मोरी चौखट सजावे ना
हाथ का कंगना मँगावे ना ....!!
दीया संग तेल की बाती बनूँ मैं
करूँ उजियारा सारी रैन जलूँ मैं
साथी बिन रतियाँ सुहावे ना
यारा मोरी चौखट सजावे ना
हाथ का कंगना मँगावे ना .....!!
उलट पलट के सपन बुनूँ मैं
आप लिखूँ ख़त आप पढ़ूँ मैं
कागा पीह की बतियाँ सुनावे ना
यारा मोरी चौखट सजावे ना
हाथ का कंगना मँगावे ना .....!!
" विक्रम चौधरी "

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