" राजपुताना....."
रेगिस्तानी ऊँट है भैया
अकड़ ना इसकी जाए
रे जिद्दी सौ सौ गोते खाए …...
बालम की फटकार ग़लत है
जूते की ललकार विकट है …
रपट ना बैरी खाए
रे उलटी गिनती मुझे पढ़ाये ……
छोड़ चली अब नार ग़ुलामी
पड़ गयी भारी तोप सलामी
झपट के रोटी खाए
रे तिरछे नैना कड़े दिखाए …..
ज़ालिम की तलवार कलम है
हाक़िम का व्यापार मरम है
रहम ना जी पे खाए
रे खाता अनपढ़ पे चढ़ जाए …..
नाक के सुर में नाग है भैया
नक़द से हल्का चाँद है भैया
कमर पे लचके खाए
रे बन्दा मन की पुड़ी बनाए …..
नक़द से हल्का चाँद है भैया
कमर पे लचके खाए
रे बन्दा मन की पुड़ी बनाए …..
******** विक्रम चौधरी *********

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