" बन्दानवाज़ी ....."
अजनबी है ऐतराज़ी
चलना शीशे के सहारे हमको मंज़ूर नहीं
अपनी सूरत के इशारे इतने कमज़ोर नहीं
जितना देखा है अभी तक तुमको देखा है
मेरे चेहरे में रफ़ीकों ऐसी कोई बात नहीं
जीना हमको भी है साथी
बाक़ी मर्ज़ी है ख़ुदा की
उनके हँसने के बहाने हमने ढूँढे हैं कई
ग़म के दस्तूर पुराने हमने भूले हैं कई
इश्क़ सीधा सा है मेरा हमने देखा है
दिल दुखाने के तरीक़े तुमने सीखे हैं कई
छोड़ो एक पल को उदासी
वरना दम लेगी ये बाज़ी
वल्लाह ये बन्दानवाज़ी
अजनबी है ऐतराज़ी ....!!
************ विक्रम चौधरी ************

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