" मैं ......"
जा कर रब घर भी छना नहीं …
मन भर वैश्या पे छायी हवस …
पर पेट से आदम जना नहीं ….
मैं दान नहीं वरदान नहीं
नीयत से भी शैतान नहीं
मैं दया नहीं मैं दग़ा नहीं
मैं हया नहीं मैं बयां नहीं
तप कर छोड़े सब दोष ग़रज …
पर राम का वानर बना नहीं ….
मैं मौन नहीं आवाज़ नहीं
हूँ छाँव मग़र परवाज़ नहीं
तप कर छोड़े सब दोष ग़रज …
पर राम का वानर बना नहीं ….
मैं मौन नहीं आवाज़ नहीं
हूँ छाँव मग़र परवाज़ नहीं
मैं नफ़ा नहीं मैं बिका नहीं
मैं ख़ता नहीं मैं दुआ नहीं
बिन बादल बदरी जाए बरस ...
पर आँगन मेरा खुला नहीं .…
मैं झूठ नहीं मैं साँच नहीं
हूँ राख़ मग़र मैं ख़ाक नहीं
बिन बादल बदरी जाए बरस ...
पर आँगन मेरा खुला नहीं .…
मैं झूठ नहीं मैं साँच नहीं
हूँ राख़ मग़र मैं ख़ाक नहीं
मैं बचा नहीं मैं जला नहीं
मैं हँसा नहीं मैं लुटा नहीं
जल कर कलयुग भी खाए तरस ...
पर जिन्न का वारिस थमा नहीं ....
मैं पाप नहीं मैं पुण्य नहीं
हूँ गोल मग़र मैं शून्य नहीं
जल कर कलयुग भी खाए तरस ...
पर जिन्न का वारिस थमा नहीं ....
मैं पाप नहीं मैं पुण्य नहीं
हूँ गोल मग़र मैं शून्य नहीं
मैं धुला नहीं मैं घुला नहीं
कारण बिन पूछे चला नहीं
मंदिर मस्ज़िद में चढ़े कनक …
पर खेत ये बंजर फ़ला नहीं …!!
मंदिर मस्ज़िद में चढ़े कनक …
पर खेत ये बंजर फ़ला नहीं …!!
******* विक्रम चौधरी *********

its awesome man.
ReplyDeletekeep it up.
m speechless Vikram .... God Bless U Buddy !!!
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