बेटी बन के हुई अभागन
भाग में झूठी गोद मिली
खेल खिलौने टूटे फूटे
दुनियाँ चार दीवार मिली ....
बन के बहन हुई मैं कारण
भाई की चिंता रोज बढ़ी
आन बने मेरे तन के टुकड़े
बाप के जी का जाल बनी ....
पत्नी बन के हुई मैं दासी
सास ननद की फाँस बनी
हाथ में आये चौके चूल्हे
सेज पति की रात बनी ....
बारी आयी माँ बनने की
लड़की से औरत बनने की
सौभाग्यवती बहु बनने की
कोख को भी आदेश हुआ है
लाल जानेगी यही दुआ है
जो बेटी तूने जन्मी तो
जीवन भर जलने की सज़ा है ....
मैया बन के हुई मैं प्यासी
ममता लहू लुहान हुई
बेटी जन के कोख अभागन
जग में लुटती लाज हुई ..........!!
" विक्रम चौधरी "

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