" कृष्णा उदास ....."
साँचा तन साँस छोड़े झूठ के बखेड़ों में
धुआं धुआं बढ़े दुआ भीड़ के थपेड़ों में
आधी लगे भरी पूरी बात
बिन राधा लगे कृष्णा उदास .....
जैसे सुख चले दुःख लेके साथ
बिन पानी नहीं बुझे जी की प्यास
जैसे साधू कहे जनता को दास
बिन बाती दीया सूनी काटे रात ....!!
छोटे छोटे हाथों की नन्ही सी हथेली है
करे हुड़दंग माया कैसी ये पहेली है
रोये मन पढ़ी जाए बात
बिन साथी लगे सपनों में आग .....!
मुरझाती आँखों में नखरे नवेले हैं
अस्सी पार उमरों के दुखड़े अकेले हैं
मिली बिन गुदड़ी की खाट
बिन पूँजी नहीं जीवन के ठाठ .....!
बलखाते रस्तों पे धूप की सवारी है
सूखे सूखे पनघट सूरतिया कारी है
ढूँढे सर छैया का पात
बिन माझी नहीं नदिया में राग .....!
आधी लगे भरी पूरी बात
बिन राधा लगे कृष्णा उदास .........!!
" विक्रम चौधरी "

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