" नन्ही सी एक परी ...."
पुरानी सारी चीज़ें
पुराने वॉल पेपर
उतार फैंके मैंने ....
सजा दी अलमारी में बार्बी डौल प्यारी
ताली बजाता बन्दर की वॉल भी गुलाबी ...
आने वाली है
नन्ही सी एक परी
खिलने वाली है
बंद सी एक कली ....
उड़ा उड़ा सा तन उड़ा उड़ा सा मन
अपनी ही बातों में बीत जाए दिन ...
महकने वाली है
होठों की पंखुड़ी
आने वाली है
नन्ही सी एक परी .....!
गुज़रते गए पल बढ़ी है उलझन
नहीं है सच ये ख़ाबों की धड़कन
बैठी हैं आँखें खोले शिकारियों की साँसें ...
मिले जो जिस्म कच्चा वहीँ वो दाँत मारें ...
है इंतज़ार उनको भी नन्ही परियों का
सूनी सी गलियों में नन्हे से क़दमों का
अकेली सड़कों पे नशीली कुव्वतों का
फूलों सी मंद मंद मुस्कुराहटों का .....
लगता है मुझे डर
ना हो ऐसी महर ...
भरे ना गोद मेरी
दुआ हो बे असर ....
पुरानी सारी चीज़ें
पुराने वॉल पेपर
लगाए फिर से मैंने ...
सजाया अलमारी में ब्लैक फ्रेम खाली
आँखें छुपाता बन्दर थोड़ी गुस्से की गाली ...
आने वाली है
नन्ही सी एक परी ...
आँखें है मेरी
अभी डरी डरी ..........!!
" विक्रम चौधरी "

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