" पंचतत्व ....."
प्राण है वायु
जीवन है जल
अन्न है भूमि
अम्बर आँचल
अग्नि है सत्य जो कर दे शुद्ध
नश्वर है जिस्म फ़ना हो जा ...
चिंतन से चित्त बना दे सख्त ...
पंचतत्व है कर्मचक्र .....!
धर्म जात का भांडा फोड़
शब्द जाल का ताला तोड़
मानव को मन्त्र बना सर्वत्र ...
पंचतत्व है कर्मचक्र .....!!
ऊँच नीच को शून्य में जोड़
इच्छा पथ भिक्षा पे छोड़
साधन को कष्ट बना हर वक़्त ...
पंचतत्व है कर्मचक्र .....!!!
********** विक्रम चौधरी ************

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