" ज़िद ....."
मन संग जंग छिड़ी ....!
शरबत में भगवान के दर पे
विष की धार पड़ी ....!!
जंतर खेल तपस्वी राजा सरबस जतन लगावे
मतवारी अय्यार मेनका कामुक रास दिखावे
भिक्षा में जोगी की हांडी पल पल पेट बढ़ावे
तोहमत पे इन्सान आम सीरत के दाग छुड़ावे
ऐसे में चालाक बाणिया पत्थर मोल बतावे ....
अजी सौ मन की बेगार मजूरी
रोवे धूल चढ़ी ....!
घूँघट में लाचार साँवरी
सूखी डोल मरी ....!!
बेमन बोझ भुलक्कड़ काया रब की रटन लगावे
कारण बूझ जगत मिथ्या के सच का भजन सुनावे
जिव्याह काज सपन निद्रा के बाँध पुड़ी मंडरावे
सोहबत में बेइमान चतुर सब दोष पराया गावें
ऐसे में चालाक भेड़िया शेर का माँस छुड़ावे ....
अजी सो गयी रे ईमान बेच के
ग़ैरत सोन चढ़ी ....!
दान घटा घर घर माँगन पे
सूरत बोल पड़ी ....!!
*************** विक्रम चौधरी ****************

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