Monday, 30 January 2012

" शब्द मुक्त ......"

















" शब्द मुक्त ......"

मैं  शब्द  हूँ  मैं  शब्द  के  गुनाह  पर  क़ुबूल  हूँ ..
कलमों  की  पाबंदगी  में  बे-कलम  रसूल  हूँ ..
मैं  इश्क़  हूँ  महिवाल  का ..
मैं  सज्दा  राँझे  यार  का ..
क्यों  नामुराद  शब्द  हूँ ..
मैं  फ़लसफ़ा  शिकार  का ......!

मैं  जन्म  से  ही  शब्द  के  आमाल  का  जुलूस  हूँ ..
मैं  अंत  में  भी  शब्द  के  एजाज़  का  जमूद  हूँ .. 
मैं  हश्र  हूँ  गुलफ़ाम  का .. 
मैं  इब्न  इब्तिसाम  का ..
क्यों  फ़र्क़-ए-इल्म  शब्द  हूँ ..
मैं  इस्म  शम्मा-ए-बाम  का ......!

मैं  अक़्स  में  भी  शब्द  के  सवाल  का  वुजूद  हूँ ..
मैं  अत्फ़  में  भी  शब्द  के  तज़ाद  का  सबूत  हूँ ..
मैं  अक़्ल  से  भी  शब्द  के  ख़याल  का  ख़ुलूस  हूँ ..
मैं  हम्द  में  भी  शब्द  की  अक़ीदतों  का  शूल  हूँ .. 

मैं  हूँ  दरख़्त-ए-इल्तेजा  शब्दों  से  छिल  कर  क्षुब्ध  हूँ ..
मैं  हूँ  अबद  की  इन्तेहां  शब्दों  में  बन्ध  कर  रुद्ध  हूँ ..

इन  ग़िरहों  को  खुल  जाने  दो ..
इन  शब्दों  को  घुल  जाने  दो ..
हैं  रुतबे  सारे  शब्दनुमा .. 
शब्दों  के  हक़  धुल  जाने  दो ..

मैं  शब्दों  में  ही  क़ैद  हूँ ......
मुझे  शब्द  मुक्त  हो  जाने  दो ......!!!!!

******* विक्रम  चौधरी *******

शब्दार्थ -

आमाल  - जादू  टोना  और  जंतर  मंतर .
एजाज़ - चमत्कार 
जमूद - ठहराव 
इब्न - पुत्र 
इब्तिसाम - मुस्कुराहट 
इल्म - ज्ञान
इस्म - नाम 
बाम - चबूतरा
अत्फ़ - दया 
तज़ाद - विरोधाभास 
ख़ुलूस - सच 
हम्द - भगवान  की  स्तुति 
अक़ीदत - विश्वास 
क्षुब्ध - अशांत 
अबद - अनंतकाल 
रुद्ध - कुचला  हुआ 

No comments:

Post a Comment